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जानिए क्यों हैं प्राइवेट स्कूल कैब आपके बच्चे के लिए खतरनाक ?

राजधानी दिल्ली ही क्या देश के लगभग हर हिस्से में माता पिता के लिए अपने बच्चे का स्कूल में एडमिशन करवाने के बाद सबसे बड़ा सिर दर्द होता है उसके लिए सही स्कूल ट्रांसपोर्ट ढूँढना| माता पिता के सामने कई विकल्प होते हैं जैसे स्कूल द्वारा चलाई जाने वाली स्कूल बस, प्राइवेट तौर पर चलने वाली स्कूल बस या फिर प्राइवेट स्कूल कैब्स| जहाँ एक तरफ स्कूल की बसों की सुविधा हर जगह पर उपलब्ध नहीं होती वहीँ पर स्कूल अपनी खुद की बसों की सुविधा देते हैं वहां पर उनका किराया आसमान छूता है| इन्ही बातों का फायदा उठाते हैं प्राइवेट स्कूल कैब्स चलने वाले|

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प्राइवेट स्कूल कैब्स दो तरह की होती हैं, एक वो जो कमर्शियल नंबर पर रजिस्टर्ड होती हैं (पीली नंबर प्लेट वाली) और दूसरी वह जो प्राइवेट नंबर रजिस्टर्ड होती हैं (सफ़ेद नंबर प्लेट वाली)| कानूनी तौर पर सफ़ेद नंबर प्लेट वाली गाड़ियाँ कमर्शियल काम के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकती यानि सफ़ेद नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का प्राइवेट स्कूल कैब्स के तौर पर इस्तेमाल बिलकुल गैर कानूनी होता है|

कमर्शियल प्राइवेट स्कूल कैब्स में जहाँ स्पीड गवर्नर, जी.पी.एस., आग बुझाने वाले उपकरण एवं और भी कई तरह के सुरक्षा के लिहाज़ से जरूरी उपकरण अनिवार्य होते हैं वहीँ प्राइवेट नंबर रजिस्टर्ड स्कूल कैब्स में ये सभी चीज़ें नहीं होती | मतलब कि आपका बच्चा प्राइवेट नंबर रजिस्टर्ड स्कूल कैब में बिलकुल भी सुरक्षित नहीं होता|

माता पिता अक्सर अपने कुछ छोटे छोटे फायदों के लिए अपने बच्चों की सुरक्षा से अनजाने में ही सही लेकिन समझौता करते हैं| माता पिता अक्सर प्राइवेट स्कूल कैब्स की सेवाएं इसलिए लेते हैं क्योंकि प्राइवेट स्कूल कैब्स उनके बच्चे को उनके घर के दरवाज़े पर पिक एंड ड्राप की सुविधाएं देते हैं और जहाँ पर स्कूल बस नहीं जाती वहां पर भी प्राइवेट स्कूल कैब्स आसानी से उपलब्ध होती हैं|

कई बार माता पिता प्राइवेट स्कूल कैब्स के सस्ते किराये के चक्कर में आकर अपने बच्चे की सुरक्षा से समझौता कर बैठते हैं लेकिन असल में प्राइवेट स्कूल कैब्स, स्कूल बस से भी महंगी होती हैं क्योंकि प्राइवेट स्कूल कैब्स में दोगुनी कैपेसिटी से भी ज्यादा बच्चे ठूस ठूस कर भर कर ले जाये जाते हैं| इसको उदहारण से समझें – मान लीजिये एक 5 सीटर मारुती ईको जिसमे ज्यादा से ज्यादा 6 बच्चे बैठाये जा सकते हैं उसमे 12-15 बह्च्चे तक भर लिए जाते हैं तो एक बच्चे के हिस्से आती है केवल 1/3 से 1/4 सीट और उसके लिए माता पिता देते हैं कम से कम 1200-2000 रुपये प्रति महीने तक| मतलब एक सीट की कीमत हुई 3600-8000 रुपये तक| क्या कभी किसी माता पिता ने सोचा है उनको प्राइवेट स्कूल कैब कितनी महंगी पड़ रही है ?

क्या कहते हैं माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश |

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल में पढने वाले बच्चों के स्कूल ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर कई बार चिंता जाहिर की है| माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने दिनांक 16-12-1997 के आदेश में स्कूल में पढने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए कई निर्देश दिए थे| (आदेश पढने के लिए यहाँ क्लिक करें|) लेकिन हम देखते हैं कि ज्यादातर प्राइवेट स्कूल कैब चालक इन आदेशों और निर्देशों की खुलेआम अवहेलना करते हैं और पुलिस भी इन पर किसी तरह की कोई सख्ती बरतती नज़र नहीं आती | ऐसा लगता है जैसे प्राइवेट स्कूल कैब्स के रूप में पूरा संगठित गिरोह काम कर रहा हो |

यह भी पढ़ें  – 25 feared dead after school bus collides with truck in Uttar Pradesh’s Etah District

हम आपको बता दे कि आए दिन दिल्ली में और इसके आस पास भी प्राइवेट स्कूल कैब्स और कई स्कूल बसों के भी एक्सीडेंट होते रहते हैं और ज्यादातर इन मामलों में माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं |

क्यों होते हैं प्राइवेट स्कूल कैब्स के ज्यादा एक्सीडेंट ?

ज्यादातर प्राइवेट नंबर रजिस्टर्ड स्कूल कैब्स में नियम से कहीं ज्यादा बच्चे बैठा लिए जाते हैं, उनमे स्पीड गवर्नर (एक ऐसा उपकरण जिससे गाडी को एक निश्चित स्पीड से ज्यादा तेज़ नहीं चलाया जा सकता) नहीं लगा होता, उनमे आपात स्थिति से निपटने के लिए नियमानुसार सुरक्षा उपकरण नहीं लगे होते हैं जिसके कारण वो अक्सर एक्सीडेंट की शिकार हो जाती हैं | इसके उलट कमर्शियल नंबर रजिस्टर्ड स्कूल बस/ कैब को हर साल सरकार द्वारा निर्धारित स्थानों पर फिटनेस टेस्ट से गुजरना पड़ता है  और इसलिए उनमे नियमित तौर पर सभी सुरक्षा मानकों को पूरा किया जाता है| प्राइवेट नंबर रजिस्टर्ड स्कूल कैब्स को जहाँ कोई भी बिना उपयुक्त अनुभव वाला ड्राईवर चला रहा हो सकता है वहीँ कमर्शियल नंबर रजिस्टर्ड स्कूल बस/ कैब को केवल अनुभवी एवं पुलिस सत्यापित ड्राईवर ही चला सकता है| तो इन सभी कारणों के चलते ही अक्सर देखा जाता है कि प्राइवेट स्कूल कैब्स दुर्घटनाओं की शिकार होती रहती हैं और कई घरों के मासूम चिरागों को भुझा देती हैं|

इसलिए अगली बार जब आप अपनी थोड़ी सुविधा के लिए अपने बच्चों की सुरक्षा को दांव पर लगायें तो एक एक बार जरूर सोचियेगा कि क्या यह जायज़ हैं?

यह भी पढ़ें – Children in School Cabs Still at risk.

हम आपको आगे भी आपके बच्चों कि सुरक्षा के लिहाज़ से जरूरी जानकारियां देते रहेंगे | इसके लिए आप हमारी वेबसाइट को नियमित रूप से विजिट करते रहिये |

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Delhi’s Dangerous School Vans: Children Forced to Sit on CNG Cylinders

COURTESY : NDTV

Twenty-five children in an eight-seater van – that is how many children go to school in Delhi. They sit crammed, eight to a seat, another bunch is seen perched on CNG cylinder. In most cases, the vehicle has no transport department clearance and is therefore illegal.

As per rules, a maximum of 12 children are allowed in these eight-seater vans. According to government figures, a child died and over 70 were injured in school van accidents in the last three years.

Over two days, NDTV visited many schools to find the dangers our children face every day.

Outside one of south Delhi’s private schools, the team spotted a school van. It had a private number and so was plying without a permit. Visibly scared of camera, the driver bolted.

In another van, children were seen sitting on the top of the CNG cylinder – a highly dangerous situation.

“No, we don’t make them sit on it,” the driver insisted. “He is lying… We sit on it and often it even heats up,” the children shouted back.

“Why have you stuffed so many children in a single van? It’s an 8-seater van but you have 21 kids in it,” we ask another cab driver. Caught off guard, he drives off, pushing away the mic.

Another private van was clearly very old – way beyond the permitted limit of 10 years for commercial vehicles.

We ask the children about the rides. “They stuff so many, it gets difficult to breathe in summers,” said one. “Some months ago, a girl met with an accident,” said another. “They often drive rashly as they have two rounds of children to pick up,” piped up a third.

Finally after much coaxing, a driver spoke off the record. “I have been challaned twice, but we get away,” he confided.

“We can go on impounding and challaning vehicles, but that doesn’t solve the problem. The schools and parents need to come together for a holistic solution,” said Mukhtesh Chandra, Special CP Traffic.

  •  The cab should have a yellow stripe on its sides with the details of the driver at the rear end.
  •  The car number should start from 1K, which means the cab and the driver has the necessary            permits, which are given only after background checks.
  •  There has to be a fire extinguisher and a first aid box inside.
  •  The driver should have details of the guardians for emergencies.

(This story has been taken from http://www.ndtv.com/delhi-news/children-forced-to-sit-on-cng-cylinders-in-delhi-school-cabs-ndtv-investigation-1212973  for awareness purposes and the content has not been edited by the staff of bookmywings.com)

Children in school cabs still at risk

COURTESY : TIMES OF INDIA

NEW DELHI: Two recent accidents involving school vans have triggered fresh concern over the safety of children travelling in school vans. While twelve schoolchildren died and 20 were injured in Ambala on Monday as their overloaded van collided with a truck in dense fog, a second accident was reported in Bhopal on Tuesday where three schoolchildren were injured when their bus overturned. In Delhi, at least five fatal accidents involving school-related vehicles took place in 2011. Six persons got killed, none of them students.

But it’s an unsafe ride to school for Delhi’s kids, too. Packed in overcrowded cabs, school-going children are often left to the mercy of reckless drivers. Out of around 2,000 registered private schools in the city, only 707 schools provide vans that have been authorized by the transport department till July 31, 2011.

The authorization process is time-consuming with a long list of applicants seeking permission to run cabs. The result — thousands of illegal cabs are plying on roads, endangering the lives of students.

“We have issued licences to 707 motor cabs and 5,971 maxi cabs (bigger school vans) till July 31, 2011. For vehicle owners to be authorized to carry schoolchildren, they have to first get commercial licences and then get special permits. It is a long-winded process as there are multiple requirements that have to be met,” said a senior transport official.

Though the transport department has laid down stringent guidelines concerning school vehicles, they are rarely followed on ground. Most school vans are crammed with students and driven by people who don’t have valid licences. Delhi government has also mandated educational institutes to keep a check on illegal cabs.

Auto experts feel that these vehicles pose a grave threat of toppling over when overcrowded and driven rashly. “Built with a ‘tall-boy’ construction, these cabs are designed to carry humans in a respectable fashion and not ferry them like cattle. ,” said an expert.

“We issue a circular to parents every three months to ensure that their child is travelling safely to the school and back. We have often noted down van numbers of errant drivers and handed them over to the police,” said Ameeta Mulla Wattal, principal, Springdales School, Pusa Road.

School authorities also claim that they have tried to bring in dependable drivers. “We understand the gravity of the issue and have issued circulars to parents encouraging them to switch to school buses. Since buses do not drop children at their doors, school vans are in demand. We have issued a card to each van owner with his picture on one side and the student’s photo on the other. The driver has to produce the card before collecting the child,” said Suman Kumar, principal, Bluebells School, East of Kailash.
Parents rue that they are forced to send their children in these vehicles due to a lack of choice. “I have a seven-year-old son who goes to school in a van. Earlier, we had to tell the school to get rid of the driver because he drove rashly. Though the school replaced the driver, there is no conductor in the van. But what other choice is available?” said Binoy Mitra, a parent.
As per the law, unauthorized cabs can be booked under overloading (Rs 2,000 fine), permit or registration violations (Rs 2,000 fine) and dangerous driving (Rs 1,000 fine). Traffic police claim to have prosecuted at least 4,876 vans in 2011. At least 696 vehicles were prosecuted for dangerous driving, 463 were found without valid permits and 390 vehicles were carrying students more than the permissible limit of 12 children. At least 171 cab owners allowed unauthorized people to drive these vehicles and 52 drivers did not have a driver’s license. While 634 such cabs were impounded for major violations, 93 vehicles didn’t have speed governors.
“We’ve come down heavily on errant drivers with prosecutions having gone up by six times in 2011 than 2010. There is an urgent need for upgrading infrastructure to root out the menace,” said joint commissioner of police (traffic) Satyendra Garg.
(The article has been taken from http://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Children-in-school-cabs-still-at-risk/articleshow/11357298.cms for awareness purposes and the content has not been edited by the staff of bookmywings.com)

25 feared dead after school bus collides with truck in Uttar Pradesh’s Etah district

COURTESY : TOI

NEW DELHI: At least 25 people including 18 school children were killed and 50 injured as a school bus was hit by a truck on Thursday in Etah district.

The bus was ferrying students to Aliganj’s JS Public School in Etah. Thirty six among the 50 injured are stated to be critical, sources said.

According to eyewitnesses, it took an hour to take out the bodies from the mangled school bus. The victims were identified as students of J S Public school, Aliganj.

The school was open even after the district magistrate declared three days holiday considering the extreme weather.

After the incident, DM, SSP, Aliganj CO and other officials visited the spot and government hospital where the victims were brought.

Anguished by tragic accident in UP’s Etah . I share the pain of the bereaved families & condole passing away of young children: PM Modi

— ANI UP (@ANINewsUP) January 19, 2017

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